फिल्म: हँसते ज़ख़्म के गीत "आज सोचा तो आंसू भर आये" की रिकॉर्डिंग के दोरान लता जी इतनी भावुक हो गयी कि रिकॉर्डिंग पूरी होने से पहले ही उन्होंने रोना शुरू कर दिया| मदन मोहन जी ने उनसे तुरंत घर जाकर आराम करने और अगले दिन रिकॉर्डिंग के लिए फिर से वापस आने का अनुरोध किया| अगले दिन लता जी ने आकर इस गाने को बहुत प्रभावी ढंग से गाया|
महान संगीतकार गुलाम मुहम्मद की बहुत ही दुर्लभ रचना। मुहम्मद रफ़ी साहब द्वारा गाया गया यह गीत "ये किसकी आँखों का नूर हो तुम" फिल्म पाकीज़ा के लिए रिकॉर्ड किया गया बहुत ही नायाब गीत है| परन्तु इस गीत को फिल्म में शामिल नहीं किया गया था| यह गीत फिल्म पाकीज़ा के अन्य गीतों से बहुत अलग शैली का लगता है|
 
जब फिल्म सीमा का गीत `कहाँ जा रहा है' रफी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था तब गीत के अंतिम अंतरा में "... वो क्यूं तोड़ डाले.... " के शब्द जब "तोड़" गाते हुए रफ़ी साहब की आवाज़ फट गयी थी। आम तौर पर, किसी भी ऐसी विसंगति को हटा दिया जाता है और गाना फिर से रिकॉर्ड किया जाता है। शंकर ने इस गीत को फिर से रिकॉर्ड करने का आदेश दिया। लेकिन जयकिशन ने हस्तक्षेप किया और शब्द "तोड़" में फटी आवाज के साथ इस गीत को बनाए रखने के लिए शंकर को कहा। क्यूंकि यह गीत एक दुखद दृश्य के लिए फिल्माया जा रहा था, इसलिए फटी आवाज में यह बहुत ही प्रभावी होगा, जयकिशन ने शंकर को समझाया। यह अंत में यह शंकर द्वारा स्वीकार कर लिया गया। इस फिल्म को देखने के बाद पता चलता है कि जयकिशन का निर्णय कितना प्रभावी था|